अनसुनी बातें
की चीखना है मुझे चिल्लाना है मुझे इतना की हर वो दर्द निकल जाए जो बरसों से लेकर बैठी हूं। बहुत कुछ कहना है सुनना है सबको बताना है ऐसा की पूरी तरह से खाली मैं हो जाऊं रुखसती से पहले। बातें जो अधूरी है उसे पूरी करनी है ।कहानी जो अधूरी है उसे पूरी करनी है। की मैंने रेत को समेटने की कोशिश की है।नदी के प्रवाह को रोकने की कोशिश की है।समंदर में डूबने की कोशिश की है।जलते हुए दिए को बुझाने को कोशिश की है अपने हाथों से। बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी है अपनी खुशी की तुम्हें ये जान कर भी की तुम पहले से ही खुद दबे हो।बहुत बड़ी हिस्सेदारी दे दी है अपनी जिंदगी की ये जान कर भी की तुम इसे संभाल नहीं पाओगे। जानती हूं सबकुछ फिर भी ये गलती करती हूं ।हर रोज करती ही । की तुमसे ये शिकायत करती हूं।की तुमसे ये चाहत करती हूं। जो मेरा कभी न हुआ है और न कभी हो सकता है उसके लिए हर रोज दुआ करती हूं। की साज़िश थी ये हमारी जो तुम्हें अपना बनाना चाहा ये जानते हुए की नुकसान इसमें ज्यादा और फायदा है कम ।आंसू होंगे ज्यादा और हसी होंगे कम।दिल टूटेगा ज्यादा और जुड़ेंगे कम। बस क्या करे जी अब जो हो गया तो हो गया।