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Showing posts from August, 2023

अनसुनी बातें

की चीखना है मुझे चिल्लाना है मुझे इतना की हर वो दर्द निकल जाए जो बरसों से लेकर बैठी हूं। बहुत कुछ कहना है सुनना है सबको बताना है ऐसा की पूरी तरह से खाली मैं हो जाऊं रुखसती से पहले। बातें जो अधूरी है उसे पूरी करनी है ।कहानी जो अधूरी है उसे पूरी करनी है। की मैंने रेत को समेटने की कोशिश की है।नदी के प्रवाह को रोकने की कोशिश की है।समंदर में डूबने की कोशिश की है।जलते हुए दिए को बुझाने को कोशिश की है अपने हाथों से। बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी है अपनी खुशी की तुम्हें ये जान कर भी की तुम पहले से ही खुद दबे हो।बहुत बड़ी हिस्सेदारी दे दी है अपनी जिंदगी की ये जान कर भी की तुम इसे संभाल नहीं पाओगे। जानती हूं सबकुछ फिर भी ये गलती करती हूं ।हर रोज करती ही । की तुमसे ये शिकायत करती हूं।की तुमसे ये चाहत करती हूं। जो मेरा कभी न हुआ है और न कभी हो सकता है उसके लिए हर रोज दुआ करती हूं। की साज़िश थी ये हमारी जो तुम्हें अपना बनाना चाहा ये जानते हुए की नुकसान इसमें ज्यादा और फायदा है कम ।आंसू होंगे ज्यादा और हसी होंगे कम।दिल टूटेगा ज्यादा और जुड़ेंगे कम। बस क्या करे जी अब जो हो गया तो हो गया।

दबी हुई जुबां

 लम्हा लम्हा बीत रहा उम्र ढल रही लेकिन आज भी इस सीने में दबी हुई जुबां रातों को सोने नहीं देती।कहते है वक्त हर मर्ज की दवा है लेकिन कुछ ऐसे दर्द है जिसकी कोई दवा नहीं। कुछ लोग कहते है हमें अपने कल को छोड़ आगे बढ़ना चाहिए सच भी है लेकिन क्या करे इस दबी जुबां का जो हर मोड़ पे याद दिलाती है की जो आज है तू वो कल की वजह है । इस कोरे कागज़ के टुकड़े उस लम्हे को कैद तो कर सकते लेकिन उसे जी नहीं सकते।शायद ही मैं गलत थी उस वक्त लेकिन उस नन्हे दिल को कैसे समझाऊं जो दिल ही दिल में ना जाने किन जज्बातों को लेकर बैठा था दबी हुई जुबां के साथ। ना जाने कितने डर थे कितने सपने और न जाने कितने हकीकत जिनका सामना करना था उस नन्ही जान को दबी हुई जुबां को लेकर।ये जज़्बात शायद हमें विरासत में मिली थी अपनी मां से जो उसके आंसू देखकर खुद ही पिघल जाया करती थी।उसके साथ बीते हर पल को समेटना चाहती थी की फिर ये मिले ना मिले ,उसके हर दर्द को अपना बनाना चाहती थी। लेकिन ये मुमकिन न था क्योंकि कुछ पाने के लिए हमें कुछ खोना पड़ता है और बहुत कुछ पाने के लिए बहुत कुछ सहना पड़ता है।कुछ ऐसा ही था जिसने हमें सिखाया उस नन्ही...