baarish

 बारिश 


बारिश से बहुत ही ख़ूबसूरत रिश्ता जुड़ा है। एक कहानी जिसकी शुरुआत होती है बारिश के उस दिन से जब पहली बार किसी के लिए कुछ एहसास दिल में जागे, कुछ ऐसा जो बहुत ख़ूबसूरत था। उस पल ऐसा लग रहा था की  ये बारिश कभी रुके ना। हम पहली बार नहीं मिले थे। रोज की तरह बस हम साथ चल रहे थे। 

 उस दिन भी वो मेरा इंतजार कर रहा था हर दिन की तरह जब मैं निकली अपनी क्लास से वो खड़ा था मेरे लिए। खुश थी मैं , उसके साथ होकर खुश होती थी मैं। उसके साथ होकर मैं खुद को सिक्योर फील करती थी। हम आगे बढे ऑटो में बैठने को मैं जा रही थी लेकिन उसकी तरफ देखा और मैं रुक गयी , वो अपनी बातों में मगन। हम दोनों साथ चलने लगे बिना किसी रोक टोक।  हम टेस्ट के सवाल पे डिस्कशन कर रहे थे। थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गयी। मेरे पास छाता था। एक छाता और हम दोंनो। बारिश का पानी  सड़क पे था। मैंने हरे रंग की सूट पहनी थी जो मेरी दीदी ने दी थी। उसने मेरी तारीफ में बस एक बार कहा ये सूट तुमपे अच्छा लग रहा। ऐसा लगा मानो दिल में घंटी बजने लगी हो। मैं सिर्फ सड़क के पानी को निहार रही थी और मेरी नज़र सिर्फ हम दोनों के कदम पे थी जो साथ बढ़ रहे थे। 

बारिश तेज हो रही थी और उसकी बातें रुक नहीं रही थी।  हमने एक शेड चुना और वहां खड़े होकर डिस्कशन चलने लगी। उसकी gk थोड़ी वीक थी।  वह बिना रुके अपनी बात किये जा रहा था।  हम एक सवाल पे रुके थे मैं कह रही थी ये सही है वो कह रहा था नहीं ये गलत है। बस देखते देखते कई घंटे निकल गए और पता भी न चला। बारिश की बूंदे कम हो चुकी थी। हम फिर से चल चुके थे अपने रास्ते। उस मोड़ पर वो मुझे छोड़ गया जहाँ अक्सर वो छोड़कर जाता था। बातें खत्म हो चुकी थी। उसके एहसास जुबां कम बोलते और आंखे ज्यादा या यूँ कहे  मैं आंखे पढ़ लेती जो वो कह नहीं पाता। खुश वो भी था और मैं भी। ख़ुशी आँखों में  थी जुबां पे नहीं।  जुबां कुछ और बोलते और आंखे कुछ और बोलते। बस वो खूबसूरत बारिश का एहसास आज भी मेरे दिल में कैद है। और उसे सोचकर आज भी दिल में अजीब सी ख़ुशी होती है और जुबां पे हंसी होती है। 


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