meri pyari nani

 मेरी प्यारी नानी 

बहुत दिनों बाद अपनी नानी की याद आयी है। मेरी प्यारी नानी जो मेरी माँ से बहुत प्यार करती थी और उतनी ही मुझसे नफरत। बचपन में उनकी बातों से मेरी आंखे भर आती थी। लेकिन आज शायद मैं उनकी तकलीफ समझ सकती हूं। मेरी माँ जो बहुत मिन्नतों के बाद हुई तो थी वो एक बेटी लेकिन बहुत दिनों बाद घर की रौनक और सबके आँखों का तारा। बड़ी ही नाजो से पाला एकलौती जान और फिर बड़े अरमानों से उसकी शादी हो जाती है। सबकुछ बहुत ही अच्छा होता है एकलौता दामाद जो होता है एकलौता बेटा , तीन बहनों का एकलौता भाई और पोता ,घर का चिराग। देखते ही देखते घर में बच्चों का आना शुरू होता है , जिम्मेदारियां बढ़नी शुरू होती है , और फिर जिम्मेदारियों का मल्टिप्लिकेशन , फिर तो कोई अंत नहीं। घर में पांच बच्चों की फौज तैयार होती है और पांचवे नंबर पे मैं.. 

मेरे से ऊपर मेरे एक भाई है लेकिन उनसे मेरी नानी को ज्यादा तकलीफ नहीं थी लेकिंन मुझसे बहुत थी। मुझे  देखते ही वो मुझे कोसना शुरू कर देती। मेरे साथ साथ वो उस दाई को भी बहुत कोसतीं जो  मुझे हटाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और मंजूर था। मुझे आना था इस दुनिया में और मुझे लाना था मेरी माँ के लिए। उनका कोसना गलत नहीं था वो सही थी अपनी जगह। मेरे पूज्य पिताजी अपने पिताजी के साथ अनबन की वजह से उन्होंने घर छोड़ने का निर्णय लिया और उन्होंने गृहस्थ आश्रम  छोड़ खुद को योगी बना लिया।  और फिर इस गृहस्थ आश्रम की ज़िम्मेदारी मेरी माँ के कंधो पर पांच बच्चों के साथ ,एकलौती बहु , एकलौती भाभी और पुरे घर का विश्वास। वो जयादा पढ़ी लिखी नहीं थी। लेकिन उसने जो किया वो किसी साधारण स्त्री के लिए संभव न था करना। पुरे परिवार ने साथ तो बहुत दिया उसका लेकिन उसका दुःख कोई बाँट नहीं सकता था । और उसका दुःख उसकी माँ के लिए असहनीय था। किस्मत का फेर देखो उनकी  ज़िम्मेवारी भी उसके कंधो पर ही थी और जब वो मुझे देखती उनके ज़ख्म मानो हरे हो जाते। मैं रो पड़ती , आंखे मेरी कभी सूखती नहीं जबतक मैं उनकी नजरों से ओझल न होती। काश वो देख पाती की मैं अपनी माँ के लिए कभी बोझ नहीं बनी बल्कि हमेशा उसकी तरह ही उसका सहारा बनी। बेटियां कभी बोझ नहीं होती वो तो परिवार की ढाल होती है।  काश वो देख  पाती। 

Comments

Popular posts from this blog

rishte

baarish