Posts

Showing posts from August, 2025

wo jati hui train...

 वो जाती हुई रेलगाड़ी वो रेलगाड़ी चल पड़ी थी, वो भी दौड़ता हुआ उसे पकड़ने के लिए निकल चूका था। वो जा रहा था लेकिन उसे मुझसे बिछड़ने का गम नहीं था। वो खुश था बहुत खुश था। बहुत दिनों बाद वो अपने घर को लौट रहा था। वो बहुत दिनों  बाद अपने परिवार से जो मिलने वाला था। उसे अपने दोस्तों को मिलने की ख़ुशी थी। बस कुछ मिनटों के लिए मिले थे हम। उसे अफ़सोस न था। उसे छोड़कर जाने का अफ़सोस  न था।  हां मुझे अफ़सोस था उसके जाने का। हां मैंने सोचा न था वो इतनी जल्दी चला जायेगा।  हां मैंने कुछ और पल साथ रहने का सोचा था लेकिन वो रुका नहीं।  वो चला गया।  मैं उसे जाते हुए देखती रह गयी उसे पता भी न चला। कई घंटे मैं उसी अवस्था में खड़ी थी..   एह्सासों में जीना और बारीकियों को समझना मेरी एक वक़्त के लिए ताकत थी जिसकी वजह से मैँ  खुद के लिए सही निर्णय ले सकती थी लेकिन अब ये मेरी कमजोरी बन चुकी थी। मुझे दर्द होता था लेकिन फिर भी मैं इसे सहने को तैयार थी। सबकुछ जानकर समझकर भी खुद को रोक नहीं सकती थी।  ये कोई पहली बार नहीं था जब उसने मुझे इग्नोर किया था।  लेकिन फिर भी ...

meri pyari nani

 मेरी प्यारी नानी  बहुत दिनों बाद अपनी नानी की याद आयी है। मेरी प्यारी नानी जो मेरी माँ से बहुत प्यार करती थी और उतनी ही मुझसे नफरत। बचपन में उनकी बातों से मेरी आंखे भर आती थी। लेकिन आज शायद मैं उनकी तकलीफ समझ सकती हूं। मेरी माँ जो बहुत मिन्नतों के बाद हुई तो थी वो एक बेटी लेकिन बहुत दिनों बाद घर की रौनक और सबके आँखों का तारा। बड़ी ही नाजो से पाला एकलौती जान और फिर बड़े अरमानों से उसकी शादी हो जाती है। सबकुछ बहुत ही अच्छा होता है एकलौता दामाद जो होता है एकलौता बेटा , तीन बहनों का एकलौता भाई और पोता ,घर का चिराग। देखते ही देखते घर में बच्चों का आना शुरू होता है , जिम्मेदारियां बढ़नी शुरू होती है , और फिर जिम्मेदारियों का मल्टिप्लिकेशन , फिर तो कोई अंत नहीं। घर में पांच बच्चों की फौज तैयार होती है और पांचवे नंबर पे मैं..  मेरे से ऊपर मेरे एक भाई है लेकिन उनसे मेरी नानी को ज्यादा तकलीफ नहीं थी लेकिंन मुझसे बहुत थी। मुझे  देखते ही वो मुझे कोसना शुरू कर देती। मेरे साथ साथ वो उस दाई को भी बहुत कोसतीं जो  मुझे हटाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और मंजूर थ...

baarish

 बारिश  बारिश से बहुत ही ख़ूबसूरत रिश्ता जुड़ा है। एक कहानी जिसकी शुरुआत होती है बारिश के उस दिन से जब पहली बार किसी के लिए कुछ एहसास दिल में जागे, कुछ ऐसा जो बहुत ख़ूबसूरत था। उस पल ऐसा लग रहा था की  ये बारिश कभी रुके ना। हम पहली बार नहीं मिले थे। रोज की तरह बस हम साथ चल रहे थे।   उस दिन भी वो मेरा इंतजार कर रहा था हर दिन की तरह जब मैं निकली अपनी क्लास से वो खड़ा था मेरे लिए। खुश थी मैं , उसके साथ होकर खुश होती थी मैं। उसके साथ होकर मैं खुद को सिक्योर फील करती थी। हम आगे बढे ऑटो में बैठने को मैं जा रही थी लेकिन उसकी तरफ देखा और मैं रुक गयी , वो अपनी बातों में मगन। हम दोनों साथ चलने लगे बिना किसी रोक टोक।  हम टेस्ट के सवाल पे डिस्कशन कर रहे थे। थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गयी। मेरे पास छाता था। एक छाता और हम दोंनो। बारिश का पानी  सड़क पे था। मैंने हरे रंग की सूट पहनी थी जो मेरी दीदी ने दी थी। उसने मेरी तारीफ में बस एक बार कहा ये सूट तुमपे अच्छा लग रहा। ऐसा लगा मानो दिल में घंटी बजने लगी हो। मैं सिर्फ सड़क के पानी को निहार रही थी और मेरी नज़र सिर्फ हम दोनों के ...

rishte

 रिश्ते  कुछ दिल के रिश्ते ,कुछ जन्म के रिश्ते,कुछ जुबान के रिश्ते ,कुछ नाम के रिश्ते, कुछ बातों के रिश्ते, कुछ वादों के रिश्ते, कुछ बहानो के रिश्ते, कुछ काम के रिश्ते,  कुछ रिश्ते ऊपरवाला बनाता है, कुछ रिश्ते हम बनाते हैं ,  कुछ रिश्ते ऊपरवाला जोड़ता है ,और कुछ रिश्ते बनाकर हम तोड़ देते हैं , रिश्ते बनाना तो हम सीख लेते हैं , लेकिन उसे संभाले कैसे ये नहीं सिख पाते , जो रिश्ते बचाते हैं , वो खुद खर्च हो जाते हैं , जो रिश्ते निभाना चाहते हैं , वो सबसे कमज़ोर  कहलाते हैं , इन सबसे ऊपर जो सबको खुश करके मिलकर रहना चाहते हैं , उनके सब्र की इंतेहा  तो रब भी लेने लगता है , और एक पल के लिए सारे रिश्ते धुँधले  हो जाते हैं , लेकिन, ये सारे रिश्ते उस वक्त आपको खुद से पहचान कराते हैं , जब आप अपने जनाज़े में शामिल लोगों को देखते हो , उस पल आपकी पूरी ज़िंदगी जो आपने दिया है और क्या लिया है और क्या किया है , इन सबका जवाब एक पल में आपके रिश्ते आपको बताकर विदा कर जाते हैं।